यरुशलम, 21 दिसम्बर (युआईटीवी/आईएएनएस)- इजरायल के शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोनावायरस का सबसे बड़ा कारण सार्स-सीओवी-2 मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। इसकी जानकारी सोमवार को दक्षिणी इजरायल में बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी (बीजीयू) ने दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, आईसाइंस जर्नल में प्रकाशित एक आनुवंशिक अध्ययन में, बीजीयू के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि कोरोनावायरस के रफ्तार से फैलने का कारण क्या है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के बावजूद भी फैल रहा है।
इसका पता लगाने के लिए उन्होंने दुनिया भर के संक्रमितों में कम्प्यूटेशनल जीव विज्ञान, जीन एक्सप्रेशन का उपयोग करते हुए एक साल के लिए विश्लेषण किया।
टीम ने जांच के दौरान देखा कि क्या माइटोकॉन्ड्रिया, ऊर्जा पैदा करने वाले कोशिका अंग, कोरोना के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसके कारण शरीर सही ढंग से फंक्शन नहीं कर पाता है।
शोधकर्ताओं ने फेफड़ों की कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया के बजाय प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया के नुकसान की पहचान की।
शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रतिरक्षा कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रियल क्षति ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ की व्याख्या करती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया है, जो बुखार, सूजन और अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों के साथ दिखाई देती है।
उन्होंने, “परिणामों के आधार पर, माइटोकॉन्ड्रिया को लक्षित करने के लिए मौजूदा उपचारों का उपयोग करना संभव है और इस प्रकार संक्रमितों की स्थिति में सुधार होता है।”