नई दिल्ली,27 फरवरी (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफ्रीका और जापान दोनों के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत के समर्पण की पुष्टि की है। जापान-भारत-अफ्रीका बिजनेस फोरम में बोलते हुए उन्होंने सहयोगात्मक विकास और रणनीतिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
जयशंकर ने दीर्घकालिक,पारस्परिक रूप से लाभप्रद साझेदारी बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए अफ्रीका के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है,जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। इसके अतिरिक्त,भारत ने अफ्रीका में 75 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है,जिसमें 12 अरब डॉलर से अधिक की बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी परियोजनाएँ शामिल हैं। यह प्रतिबद्धता क्षमता-निर्माण पहलों तक फैली हुई है,जैसे ई-विद्या भारती और ई-आरोग्य भारती नेटवर्क,जो अफ्रीकी देशों को आभासी शिक्षा और चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम के तहत 19 अफ्रीकी देशों के छात्रों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है।
जापान के संबंध में,जयशंकर ने दोनों देशों के बीच “विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी” को रेखांकित किया। उन्होंने स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए एक आम दृष्टिकोण के साथ-साथ लोकतंत्र,स्वतंत्रता और कानून के शासन के साझा मूल्यों पर जोर दिया। जयशंकर ने भारत के आर्थिक विकास में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में जापान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के विकास का आह्वान किया।
विदेश मंत्री जयशंकर के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति अफ्रीका और जापान दोनों के साथ सहयोगात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी जुड़ाव को प्राथमिकता देना जारी रखती है,जिसका लक्ष्य सतत विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।