नई दिल्ली,2 अप्रैल (युआईटीवी)- वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को आज लोकसभा में पेश किया जाना है। स्पीकर ओम बिरला ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया है,जहाँ सत्ता पक्ष के सांसद इस बिल का समर्थन कर रहे हैं,वहीं विपक्ष इसका कड़ा विरोध कर रहा है।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आजादी के बाद वक्फ बोर्ड द्वारा कब्जाई गई जमीनों को वापस लेने की लड़ाई की शुरुआत है। उनका कहना था कि हिंदुओं के 30 हजार से अधिक धार्मिक स्थलों को वक्फ की संपत्ति के तौर पर चढ़ाया गया था। यदि यह विधेयक पास होता है,तो ये सभी जगहें अब विवादित मानी जाएँगी,न कि वक्फ की संपत्ति। इसके साथ ही,उन्होंने यह भी कहा कि इससे वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्तियों के लिए अब खुद मुकदमे लड़ने पड़ेंगे।
वहीं,कांग्रेस ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का सदन में विरोध करेगी। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी इसे मुसलमानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसके विरोध का समर्थन किया। उनका कहना था कि यह बिल मुसलमानों को नुकसान पहुँचाएगा,इसलिए कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए था,लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका आरोप था कि यह विधेयक वक्फ की संपत्तियों को नष्ट करने की साजिश है और अगर यह पास होता है,तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। मौलाना यासूब अब्बास ने यह भी कहा कि विरोध शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए।
दरगाह शरीफ के खादिम हाजी पीर नफीस मियां चिश्ती ने इस विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मुसलमानों के हक और उनकी संपत्तियों पर हमला है। उनका कहना था कि इसमें गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान है,जो सही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हिंदू ट्रस्ट में मुसलमानों को शामिल नहीं किया जाता,वैसे ही वक्फ बोर्ड में भी गैर-मुस्लिमों की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। चिश्ती ने सरकार से अपील की कि इस बिल में मुसलमानों के हितों की रक्षा की जाए।
बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के लिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने देशभर से सुझाव लिए थे,जिनमें मुस्लिम समुदाय के सुझाव भी शामिल थे। उनका कहना था कि विपक्ष इस विधेयक को जाति और धर्म के नाम पर गलत तरीके से पेश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब विधेयक का पूरा ब्योरा सामने आएगा,तो लोग इसके सकारात्मक पहलुओं को समझेंगे।
अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता अनिस अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है और कहा कि इस विधेयक के जरिए वक्फ बोर्ड की लूट की दुकान बंद हो रही है। उन्होंने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधते हुए उन पर आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों का ओवैसी और उनके साथियों ने गलत इस्तेमाल किया है।
अब्बास ने कहा कि, “आज देश की जनता और हम सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करना चाहते हैं। वक्फ बोर्ड के नाम पर जो लूट की फैक्ट्री चल रही थी, मोदी जी ने उनके लाइसेंस को रद्द कर दिया है।” उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर पारदर्शिता आएगी और अवैध कब्जों पर रोक लगेगी। अब्बास ने ओवैसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ओवैसी और उनके साथियों ने वक्फ की जमीनों का इस्तेमाल केवल निजी फायदे के लिए किया है और यह कोई ऐसा उदाहरण नहीं है,जिसे देश को आदर्श के रूप में मानना चाहिए।
अजमेर दरगाह प्रमुख के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने विधेयक का स्वागत किया। उनका कहना था कि यह विधेयक वक्फ की पुरानी खामियों को दूर करेगा और संपत्तियों की लूट को रोकेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का फायदा गरीब मुसलमानों को मिलेगा और वे लंबे समय से इस बदलाव का इंतजार कर रहे थे। चिश्ती ने कहा कि 12 बजे के करीब यह विधेयक संसद में पेश होगा और उन्हें उम्मीद है कि इस पर अच्छी बहस होगी और एक बेहतर कानून पास होगा।
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने विरोध करने वाले लोगों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का हक है। उन्होंने विरोधियों के उस दावे को खारिज किया कि इस विधेयक से दरगाहें,खानकाहें या धार्मिक संपत्तियाँ छिन जाएँगी। उनका कहना था कि यह कहना गलत है और वे सरकार के आधिकारिक बयान पर विश्वास करते हैं।
इस विधेयक पर विभिन्न पक्षों के बीच तीखी बहस चल रही है और अब देखना यह होगा कि लोकसभा में इसे किस तरह से पेश किया जाता है और किस तरह से सांसद इस पर अपने विचार रखते हैं।